ज्वेलर को लूटने वाले मुंबई GRP के तीन पुलिसकर्मी सेवा से बर्खास्त

 

मुंबई सेंट्रल रेलवे टर्मिनस पर पिछले साल एक ज्वेलर से उसकी नाबालिग बेटी के सामने मारपीट और पैसे वसूलने के मामले में विभागीय जांच के बाद सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के तीन कर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। 30 मार्च को जारी बर्खास्तगी आदेश में सहायक उप-निरीक्षक ललित जगताप, कांस्टेबल राहुल भोसले और कांस्टेबल अनिल राठौड़ के नाम शामिल हैं। ये सभी मुंबई सेंट्रल GRP चौकी से जुड़े थे।

10 अगस्त 2025 को हुई इस घटना के बाद तीनों को निलंबित कर दिया गया था। वर्तमान में उनकी तैनाती GRP के घाटकोपर मुख्यालय में थी। यह घटना तब हुई जब ज्वेलर अपनी आठ साल की बेटी के साथ रक्षाबंधन के लिए मुंबई आया था और वापस राजस्थान जाने के लिए दुरंतो एक्सप्रेस पकड़ने वाला था। उसका साला भी उन्हें मुंबई सेंट्रल टर्मिनस तक छोड़ने आया था। करीब रात 10:30 बजे वे प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर पहुंचे, जहां एक वर्दीधारी व्यक्ति ने उन्हें बैगेज जांच के लिए रोक लिया। उस पुलिसकर्मी ने, जिसने नेम टैग नहीं लगाया था, ज्वेलर के सामान में कागज में लिपटा 14 ग्राम का सोने का बिस्किट और 31,000 रुपये नकद पाए।

ज्वेलर ने बताया कि वह मुंबई में ज्वेलरी प्रदर्शनी में शामिल हुआ था और साथ ही रक्षाबंधन पर अपनी बहन से मिलने भी आया था। लेकिन पुलिसकर्मी संतुष्ट नहीं हुआ और उसने एक अन्य वर्दीधारी साथी को बुलाया, जिसने भी नेम टैग नहीं लगाया था। दोनों ज्वेलर, उसकी बेटी और साले को टर्मिनस के बाहर एक गली के रास्ते एक कमरे में ले गए, जहां एक तीसरा पुलिसकर्मी बैठा था, जिसे उन्होंने “सीनियर” बताया। तीनों ने ज्वेलर के साथ गाली-गलौज की, उसे थप्पड़ मारे और रातभर लॉकअप में बंद करने की धमकी दी। पुलिसकर्मियों ने सोने का बिस्कुट मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की धमकी दी और फोन पर उसका आधार कार्ड मंगवाने को कहा। साथ ही उससे कुछ खाली कागजों पर जबरन हस्ताक्षर भी करवाए।

ट्रेन छूटने से महज पांच मिनट पहले, रात 10:55 बजे, पुलिसकर्मियों ने सोना तो लौटा दिया, लेकिन नकदी अपने पास रख ली। ज्वेलर के अनुरोध करने पर उन्होंने 1,900 रुपये वापस किए और समय पर ट्रेन पकड़ने के लिए उसे भागने की सलाह दी। घटना से आहत ज्वेलर ने 16 अगस्त को राजस्थान में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसे बाद में मुंबई सेंट्रल GRP और फिर रेलवे क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया। सात महीनों में GRP ने विभागीय जांच पूरी कर तीनों पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया।

Leave a Comment